Thursday, December 30, 2010

इक ख्वाब.,.,. !!!


ना जाने क्यों आज गुजरा जमाना याद आ रहा है,
शायद उसने भी आज पुराना ख़त उठाया होगा .,

मुद्दतों से उनकी आरज़ू किये बैठे हैं,
हवाओं ने उसे मेरा किस्सा सुनाया होगा.,

दूर वोह भी कही राह तकती होगी मेरी,
यादों ने मेरी कभी तो उसे भी रुलाया होगा.,

...Amit Chouhanji..

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