वोह जैसे रवानी, रुके से हम है,
गुजरे हए एक ज़माने से हम हैं
वोह है इक दरिया बहता हुआ,
टेहरे हुए किसी ताल से हम हैं
वोह जैसे चाँद पूनम का चमकता हुआ,
जलते बुझते जुगनू से हम हैं
वोह फिजाओं की महकती हुयी खुशबू ,
और, हाथों को चुभते हुए काटों से हम हैं
वोह जिनके चर्चे हर सुबह शाम,
और 'प्यार' में बदनाम जरा से हम हैं !!
गुजरे हए एक ज़माने से हम हैं
वोह है इक दरिया बहता हुआ,
टेहरे हुए किसी ताल से हम हैं
वोह जैसे चाँद पूनम का चमकता हुआ,
जलते बुझते जुगनू से हम हैं
वोह फिजाओं की महकती हुयी खुशबू ,
और, हाथों को चुभते हुए काटों से हम हैं
वोह जिनके चर्चे हर सुबह शाम,
और 'प्यार' में बदनाम जरा से हम हैं !!
Piyush..'~PyaR~

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