Thursday, December 30, 2010

हम हैं ...!!!


वोह जैसे रवानी, रुके से हम है,
गुजरे हए एक ज़माने से हम हैं

वोह है इक दरिया बहता हुआ,
टेहरे हुए किसी ताल से हम हैं

वोह जैसे चाँद पूनम का चमकता हुआ,
जलते बुझते जुगनू से हम हैं

वोह फिजाओं की महकती हुयी खुशबू ,
और, हाथों को चुभते हुए काटों से हम हैं

वोह जिनके चर्चे हर सुबह शाम,
और 'प्यार' में बदनाम जरा से हम हैं !!


Piyush..'~PyaR~

ज़माने के कई रंग !!!


हमने भी ज़माने के कई रंग देखे है
कभी धूप, कभी छाव, कभी बारिशों के संग देखे है

जैसे जैसे मौसम बदला लोगों के बदलते रंग देखे है

ये उन दिनों की बात है जब हम मायूस हो जाया करते थे
और अपनी मायूसियत का गीत लोगों को सुनाया करते थे

और कभी कभार तो ज़ज्बात मैं आकर आँसू भी बहाया करते थे
और लोग अक्सर हमारे आसुओं को देखकर हमारी हँसी उड़ाया करते थे

"अचानक ज़िन्दगी ने एक नया मोड़ लिया
और हमने अपनी परेशानियों को बताना ही छोड़ दिया"

अब तो दूसरों की जिंदगी मैं भी उम्मीद का बीज बो देते है
और खुद को कभी अगर रोना भी पड़े तो हस्ते हस्ते रो देते है !!

....Amitesh Mishra..Pandy...

इक ख्वाब.,.,. !!!


ना जाने क्यों आज गुजरा जमाना याद आ रहा है,
शायद उसने भी आज पुराना ख़त उठाया होगा .,

मुद्दतों से उनकी आरज़ू किये बैठे हैं,
हवाओं ने उसे मेरा किस्सा सुनाया होगा.,

दूर वोह भी कही राह तकती होगी मेरी,
यादों ने मेरी कभी तो उसे भी रुलाया होगा.,

...Amit Chouhanji..